भारत की पहली महिला आईएएस अधिकारी अन्ना राजम मल्होत्रा (1951 बैच) ने जब इस सेवा में कदम रखा, तो उन्हें हतोत्साहित करने का प्रयास किया गया। उन्हें फील्ड पोस्टिंग के बजाय सचिवालय में काम करने की सलाह दी गई क्योंकि माना जाता था कि महिलाएं कानून-व्यवस्था और जिला प्रशासन को नहीं संभाल सकतीं। लेकिन उन्होंने हर रूढ़िवादिता को तोड़ा और यह साबित किया कि प्रशासनिक कुशलता का संबंध जेंडर (लिंग) से नहीं, बल्कि योग्यता से होता है। बदलता परिदृश्य
जिले की पूरी कानून-व्यवस्था की देखरेख करना। collector sahiba in hindi high quality
बाढ़, सूखा, या महामारी जैसी आपातकालीन स्थितियों में राहत और पुनर्वास कार्यों का नेतृत्व करना [3]। collector sahiba in hindi high quality
'कलेक्टर साहिबा' शब्द आज के नए भारत की उस सशक्त तस्वीर को बयां करता है जहाँ महिलाएं देश के विकास की मुख्यधारा का नेतृत्व कर रही हैं। वे न केवल अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन कर रही हैं, बल्कि लाखों दबी-कुचली आवाजों को एक नई उम्मीद भी दे रही हैं। जब एक बेटी 'कलेक्टर साहिबा' बनकर किसी जिले की कमान संभालती है, तो वह केवल एक प्रशासनिक अधिकारी नहीं होती, बल्कि वह आने वाली पीढ़ी के सुनहरे भविष्य की नींव रख रही होती है। collector sahiba in hindi high quality
'कलेक्टर साहिबा': पद और प्रतिष्ठा का सफर
5. चुनौतियाँ जो आज भी बरकरार हैं